डीपफेक क्या होता है? डीपफेक किस तकनीक पर काम करता है? – Deepfakes

डीपफेक क्या होता है? डीपफेक किस तकनीक पर काम करता है? डीपफेक वीडियो की पहचान कैसे की जा सकती है?

दोस्तों, फिल्मों में आपने मशहूर कलाकारों की हूबहू कॉपी करने वाले डुप्लीकेट कलाकारों को खूब देखा होगा। फिल्म ‘रामगढ़ के शोले’ तो डुप्लीकेट कलाकारों को लेकर ही बनाई गई थी। इन दिनों किसी मशहूर अदाकार की वीडियो की एडिटिंग कर डीपफेक वीडियो वायरल करने का चलन भी जोर पकड़ रहा है। यह भी कुछ कुछ डुप्लीकेसी जैसा ही है।

क्या आप जानते हैं कि डीपफेक क्या है? डीपफेक किस तकनीक पर काम करता है? डीपफेक वीडियो की पहचान कैसे की जा सकती है आदि? यदि नहीं तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। आज इस पोस्ट में हम आपको डीपफेक के संबंध में विस्तार से जानकारी देंगे। आइए, शुरू करते हैं –

डीपफेक क्या होता है? (What is Deepfake?)

दोस्तों यदि डीपफेक (Deepfake) शब्द की बात करें तो यह दो शब्दों deep एवं fake से मिलकर बना है। यहां deep से आशय deep learning से है। fake आप जानते ही हैं फर्जी को कहते हैं। ऐसे में डीप लर्निंग तकनीक पर आधारित फेक वर्जन डीपफेक कहलाता है।

किसी रियल वीडियो में दूसरे के चेहरे को फिट कर देने को डीपफेक नाम दिया गया है, जिसे आप लोग यकीन मान लें। डीपफेक से वीडियो और फोटो को बनाया जाता है। इसमें मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाता है। इसमें वीडियो और ऑडियो को टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर की मदद बनाया जाता है। इसी डीपफेक से वीडियो बनाया जाता है। साधारण शब्दों में समझें, तो इस टेक्नोलॉजी कोडर और डिकोडर टेक्नोलॉजी की मदद ली जाती है। डिकोडर सबसे पहले किसी इंसान के चेहरे को हावभाव और बनावट की गहन जांच करता है। इसके बाद किसी फर्जी फेस पर इसे लगाया जाता है, जिससे हुबहू फर्जी वीडियो और फोटो को बनाया जा सकता है। हालांकि इसे बनाने में काफी टेक्नोलॉजी की जरूरत होती है, ऐसे में आमल लोग डीपफेक वीडियो नहीं बना सकते हैं। लेकिन इन दिनों डीपफेक बनाने से जुड़े ऐप मार्केट में मौजूद हैं, जिनकी मदद से आसानी से डीफफेक वीडियो को बनाया जा सकता है।

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डीपफेक किस तकनीक पर काम करता है? (On which technique does Deepfake work?)

दोस्तों, अब आप सोच रहे होंगे कि डीपफेक किस तकनीक पर काम करती है? तो आपको बता दें कि यह ह्यूमन इमेज सिंथेसिस (Human image synthesis) नाम की तकनीक पर काम करता है। जैसे- हम किसी चीज की हू-ब-हू नकल कर लेते हैं ठीक उसी प्रकार डीपफेक से चलते-फिरते और बोलते लोगों की हू-ब-हू नकल (same to same copy) की जाती है।

जैसे कि यदि किसी युवती का डांस करते वीडियो हो और उस पर मलाइका अरोड़ा का चेहरा चस्पा कर दिया जाए। ऐसे में देखने वालों को लगेगा कि वह मलाइका अरोड़ा का वीडियो देख रहा है। दोस्तों, आपको बता दें कि डीपफेक द्वारा ह्यूमन इमेज सिंथेसिस के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (artificial intelligence) एवं डीप लर्निंग (deep learning) का सहारा लिया जाता है।

जान लीजिए कि डीपफेक दो नेटवर्क की सहायता से बनता है। इसमें एक इनकोडर (encoder ) एवं दूसरा डिकोडर नेटवर्क (decoder network) होता है। यहां इनकोडर नेटवर्क द्वारा सोर्स कंटेंट (source content) यानी असली वीडियो का विश्लेषण (analysis) किया जाता है। इसके पश्चात वह इस डाटा को डिकोडर नेटवर्क को प्रेषित करता है। यहीं से फाइनल आउटपुट जेनरेट (final output generate) होता है, देखने में बिल्कुल असली जैसा, लेकिन असल में फेक (fake) होता है।

किसी वीडियो को डीपफेक में कैसे तब्दील किया जा सकता है?

(How a video can be changed in Deepfake?)

दोस्तों, अब हम आपको बताएंगे कि किसी वीडियो को डीपफेक में किस तरह से तब्दील किया जाता है-

  • फेस स्वैपिंग (Face swaping): दोस्तों, यह तो आप नाम से ही समझ गए होंगे फेस स्वैपिंग का अर्थ चेहरा बदलना होता है। डीपफेक से वीडियो में चेहरा किसी अन्य व्यक्ति के चेहरे से बदल दिया जाता है।
  • लिप सिंकिंग (Lip sinking) : दोस्तों, असल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति द्वारा बोली जा रही बात को डीपफेक वीडियो में एडिटेड व्यक्ति के मुंह से लिप सिंक के जरिए बदला जाता है। जैसे कि किसी को द्वारा मशहूर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का डीपफेक वीडियो बना दिया गया हो और लिप सिंकिंग के जरिए आपको लगे कि वास्तविक सचिन तेंदुलकर ही यह बात कह रहे हैं।
  • पपेट मास्टर (puppet master): इसमें एक कलाकार द्वारा टारगेट की भांति एक कैमरे के सामने बैठकर मिमिक (mimic) यानी उसके हाव-भाव को कॉपी किया जाता है।
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कैसे बचा जा सकता है?

  • डीपफेक वीडियो को फेशियल एक्सप्रेशन से पहचाना जा सकता है।
  • फोटो और वीडियो के आईब्रो, लिप्स को देखकर और उसके मूवमेंट से भी पहचान की जा सकती है।

डीपफेक वीडियो को कैसे पहचाना जा सकता है?

(How a Deepfake video can be identified?)

दोस्तों, आपको बता दें कि आमतौर पर डीपफेक वीडियो को पहचानना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन हम आपको कुछ खास बातों के बारे में बताएंगे, जिनके जरिए आप कुछ हद तक डीप फेक वीडियो की पहचान कर सकते हैं, जैसे-

  • आपको वीडियो में दिख रही पर्सनैलिटी के चेहरे के एक्सप्रेशन (facial expression), उसकी आंखों की मूवमेंट (eyes movement) एवं बॉडी लैंग्वेज (body language) पर ध्यान देना होगा। इनमें मामूली सा भी फर्क आपके सामने असल-नकल में भेद का कार्य करेगा।
  • अमूमन डीपफेक वीडियो में चेहरे एवं बॉडी का कलर (body colour) मैच नहीं करता। ऐसे में आप बॉडी कलर से भी ऐसे वीडियोज की पहचान कर सकते हैं।
  • आप लिप सिंकिंग से भी इस तरह के वीडियोज की पहचान कर सकते हैं। जैसे कि डीपफेक वीडियो में संबंधित व्यक्ति के होंठ ऑडियो को मैच नहीं कर रहे होंगे।
  • डीपफेक वीडियो की पहचान आप लोकेशन (location) के आधार पर भी कर सकते हैं। जैसे कि मान लीजिए कि किसी वीडियो में रूस के राष्ट्रपति पुतिन उत्तराखंड में नृत्य करते व गढ़वाली गीत गाते दिखाई दे रहे हैं तो ऐसे में आप अपनी समझ लगाकर समझ सकते हैं कि यह डीपफेक होगा।
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सोशल मीडिया पर डीपफेक वीडियो चलने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

(What action can be taken on a Deepfake video running on social media?)

दोस्तों, सोशल मीडिया (social media) पर डीपफेक वीडियो इन दिनों सामने आ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोशल मीडिया पर ऐसे डीपफेक वीडियो चलने पर क्या कार्रवाई हो सकती है? नहीं, तो आपको बता दें दोस्तों कि डीपफेक मामले में सोशल मीडिया कंपनियों (social media company) के खिलाफ भी आईटी नियमों (IT laws) के तहत कार्रवाई (action) हो सकती है।

दोस्तों, बस यह समझ लीजिए कि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (social media platform) पर डीपफेक वीडियो चलने संबंधी शिकायत के पश्चात संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को 36 घंटे के भीतर संबंधित कंटेंट (content) को अपने प्लेटफॉर्म पर से हटाना होगा।

क्या डीपफेक पर रोक संभव है?

(Is it possible to check on Deepfake)

दोस्तों, अब सवाल उठता है कि क्या डीपफेक पर रोक संभव है? तो आपको बता दे कि फिलहाल ऐसा संभव नहीं लगता। यह अवश्य है कि किसी हाई प्रोफाइल पर्सनैलिटी (high profile personality) का डीपफेक वीडियो (Deepfake video) सामने आने पर यह जानना अवश्य संभव है कि कि वह कहां तक doctored है। ऐसे में संबंधित डीपफेक वीडियो के प्रभाव (effect) को कम करने में मदद मिल सकती है। इस संबंध में लोगों को भी जागरूक (aware) किए जाने की आवश्यकता है। यद्यपि फिलहाल यह भी बहुत प्रभावी नहीं है।

इन दिनों डीपफेक शब्द चर्चा में क्यों है?

(Why Deepfake word is in news these days?)

दोस्तों, आपने भी पिछले कुछ समय से डीपफेक शब्द बहुत सुना होगा। दरअसल, यह शब्द कुछ समय से बहुत चर्चा में रहा है। पहले अभिनेत्री रश्मिका मंदाना द्वारा डीपफेक वीडियो को लेकर की शिकायत दर्ज कराई गई थी। नया मामला विराट कोहली की पत्नी और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का सामने आया है। ऐसे में हर कोई यह जानना चाहता है कि यह डीपफेक क्या बला है।

डीपफेक से संबंधित व्यक्ति को किस प्रकार का नुकसान होता है?

(What type of disadvantages a Deepfake affected person can have?)

दोस्तों, अब बात कर लेते हैं कि डीपफेक से संबंधित व्यक्ति को क्या नुकसान होता है। पहली बात तो यह है कि डीपफेक के ज्यादातर शिकार सेलिब्रिटीज होते हैं। ऐसे में इस तरह की एडिटेड वीडियोज से उनकी इमेज (image) पर नकारात्मक प्रभाव (negative effect) पड़ता है। दूसरा, इस तरह के वीडियोज से कई बार उनकी निजी जिंदगी, रिश्तों को भी खतरा हो सकता है। इसे आप डीप लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक बड़ा नुकसान मान सकते हैं।

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